भारत में Renewable Sector आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास की सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ने वाली थीम मानी जा रही है। सरकार का 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल कैपेसिटी स्थापित करने का लक्ष्य इस पूरे क्षेत्र में तेज़ निवेश, नई टेक्नोलॉजी व बड़े पैमाने पर ऑर्डर बुक बढ़ोतरी को मजबूती दे रहा है। इसी दिशा में कुछ ऐसे Green energy Share हैं, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में न सिर्फ़ प्रभावशाली प्रगति दिखाई है बल्कि 2028–30 के बीच लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत Wealth Creation के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।
भारतीय बाज़ार में Suzlon Energy Limited, Waaree Energies Limited और Premier Energies Limited जैसे स्टॉक लगातार अपने बिज़नस मॉडल, क्षमता विस्तार, प्रोजेक्ट पाइपलाइन और रेवेन्यू ग्रोथ की वजह से चर्चा में बने हुए हैं। इन कंपनियों की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाएं यह संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में ग्रीन ऊर्जा से जुड़ा हर मजबूत खिलाड़ी भारत की Power Transition Story में अहम भूमिका निभाने वाला है।
Suzlon Energy
Suzlon Energy Limited की बात की जाए तो यह कंपनी भारत की सबसे बड़ी Wind Turbine निर्माताओं में शामिल है और कई वर्षों की वित्तीय चुनौतियों से पार पाते हुए आज अपनी सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। सितंबर 2025 तक कंपनी की फर्म ऑर्डर बुक लगभग 6,222 मेगावॉट दर्ज की गई, जो अगले एक से दो वर्षों के लिए बेहद स्पष्ट Revenue Visibility प्रदान करती है। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में कंपनी का प्रदर्शन हैरान कर देने वाला रहा, जहां इसका रेवेन्यू लगभग 85 प्रतिशत बढ़कर 3,866 करोड़ रुपये पर पहुंच गया और EBITDA 145 प्रतिशत की उछाल के साथ लगभग 721 करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया।
इतना ही नहीं, कंपनी का PAT लगभग 538 प्रतिशत की बड़ी छलांग लगाकर करीब 1,279 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो यह दर्शाता है कि Suzlon Energy अब सिर्फ़ एक Turnaround Story नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक मजबूत Green energy Share बन चुका है। पिछले पांच सालों में 1,580 प्रतिशत तक का रिटर्न देने के बाद भी यह स्टॉक अभी अपनी पुरानी लिस्टिंग प्राइस से नीचे ट्रेड हो रहा है, जो इसे दीर्घकालिक निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर बनाता है। भारत में Wind Energy की बढ़ती मांग और सरकार की Hybrid तथा Green Corridor नीतियों से Suzlon Energy के लिए अगला चक्र बेहद मजबूत हो सकता है।
Waaree Energies Limited
Green energy Share की सूची में दूसरा महत्वपूर्ण नाम Waaree Energies Limited का आता है, जिसने सोलर उद्योग में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति और विशाल क्षमता के दम पर बड़े निवेशकों का ध्यान खींचा है। 1990 में स्थापित यह कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी Solar PV Module निर्माताओं में से एक है और इसकी मॉड्यूल उत्पादन क्षमता 15.1 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है, जबकि सोलर सेल निर्माण क्षमता 5.4 गीगावॉट के आसपास बताई जाती है।
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक कंपनी के पास लगभग 200 मेगावॉट का फर्म ऑर्डर मौजूद था और विभिन्न रिसर्च अनुमानों के अनुसार इसकी अनएक्सीक्यूटेड ऑर्डर बुक 3.2 से 3.5 गीगावॉट के बीच है, जिसे अगले 12 से 15 महीनों में पूरा किया जाना है। अक्टूबर 2024 में मार्केट में लिस्ट होने के बाद Waaree Energies ने लगातार स्थिर ग्रोथ दिखाई और नवंबर 2025 के अंत तक इसका मार्केट कैप लगभग 91,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लिस्टिंग के बाद कंपनी ने लगभग 27 प्रतिशत रिटर्न दिया है, जो दर्शाता है कि यह स्टॉक आक्रामक उछाल के बजाय स्थिर और टिकाऊ रिटर्न देने वाली मजबूत ग्रीन एनर्जी कंपनी के रूप में विकसित हो रहा है। आने वाले वर्षों में मॉड्यूल और सेल निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयास, PLI स्कीम, Rooftop Solar Projects और Utility-scale Solar Plants सभी Waaree Energies जैसे अग्रणी खिलाड़ियों को लाभ पहुंचाने वाले हैं।
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Premier Energies
तीसरा प्रमुख Green energy Share Premier Energies Limited है, जो आधुनिक और उच्च कुशल सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण के लिए जाना जाता है। तेलंगाना में फैले इसके तीन बड़े मैन्युफैक्चरिंग प्लांट 3.2 गीगावॉट की सोलर सेल क्षमता और 6 गीगावॉट की मॉड्यूल क्षमता प्रदान करते हैं। 30 सितंबर 2025 तक कंपनी के पास लगभग 13,249 करोड़ रुपये की विशाल ऑर्डर बुक दर्ज की गई, जो आने वाले वर्षों के लिए बेहद मजबूत Project Pipeline का संकेत है।
यह कंपनी हाल ही में लिस्ट हुई है और शुरुआती दिनों में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद लंबी अवधि की क्षमता को लेकर विश्लेषकों का रुझान सकारात्मक बना हुआ है। इसका मार्केट कैप लगभग 44,178 करोड़ रुपये के आसपास है और शेयर कीमत लगभग 975–976 रुपये के स्तर में दिखाई देती है। प्रीमियर एनर्जी का बिज़नस मॉडल हाई-कैपेक्स वाले सोलर मैन्युफैक्चरिंग चक्र पर आधारित है, जहां सरकारी सपोर्ट, बढ़ती घरेलू मांग और निर्यात के अवसर कंपनी को भविष्य में एक मजबूत Renewable Manufacturing Leader बना सकते हैं।
भारत में Green energy Share का आकर्षण सिर्फ़ कंपनियों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन, तकनीकी प्रगति और सरकारी समर्थन भी मुख्य कारक हैं। 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन हाइड्रोजन, सोलर-पैनल उत्पादन, विंड फार्म्स और बड़े पैमाने के स्टोरेज सिस्टम देश की ऊर्जा संरचना को पूरी तरह परिवर्तित करने वाले हैं। इस परिवर्तन से सबसे अधिक लाभ उन कंपनियों को मिलने की संभावना है, जिनकी ऑर्डर बुक मजबूत है, जिनकी प्रोडक्शन क्षमता लगातार बढ़ रही है और जिनका बिज़नेस मॉडल आने वाली तकनीकी जरूरतों के साथ मेल खाता है। Suzlon Energy, Waaree Energies और Premier Energies इन सभी मानकों पर फिट बैठते हैं।
अंत में कहा जाए तो 2028–30 तक Green energy Share भारतीय बाजार की सबसे तेज़ Wealth-Creating Opportunity बन सकते हैं। हालांकि निवेश हमेशा जोखिमों के साथ आता है, लेकिन रिन्यूएबल सेक्टर की मौजूदा दिशा, सरकारी नीतियां, वैश्विक रुझान और कंपनियों की वित्तीय मजबूती यह संकेत देती है कि लंबे समय के निवेशक आने वाले वर्षों में इन शेयरों के ज़रिए अच्छा लाभ कमा सकते हैं। ग्रीन एनर्जी का अगला दशक भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में ऐतिहासिक साबित होने वाला है, और यही कारण है कि यह क्षेत्र निवेशकों के लिए लंबे समय तक आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।