रामभद्राचार्य का बयान: प्रेमानंद महाराज पुत्रवत, संतों से एकता की अपील
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हम NewsMeto.in पर सदैव सच को सामने लाने का प्रयास करते हैं। हाल ही में प्रेमानंद महाराज पर टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि प्रेमानंद जी उनके लिए बालक पुत्रवत हैं और उन्होंने कभी भी उनके प्रति अभद्र टिप्पणी नहीं की।
मुख्य बातें
- प्रेमानंद पुत्रवत
रामभद्राचार्य ने कहा कि प्रेमानंद महाराज उनके लिए पुत्रवत हैं। उन्होंने कभी कोई अभद्र शब्द नहीं कहा और जब भी प्रेमानंद उनसे मिलेंगे तो वे उन्हें आशीर्वाद देंगे और उनके दीर्घायु की कामना करेंगे। - सनातन धर्म पर खतरे की बात
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म पर चारों ओर से आक्रमण हो रहे हैं। - ऐसे समय में सभी हिंदुओं को आपसी भेदभाव भूलकर एकजुट होना चाहिए। राम मंदिर की लड़ाई के बाद अब मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि और काशी विश्वनाथ की लड़ाई भी हमें मिलकर लड़नी है।
- संस्कृत और संस्कृति का महत्व
रामभद्राचार्य ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल संस्कृत के अध्ययन पर जोर देना है। - उन्होंने कहा कि भारत की असली पहचान “संस्कृत और संस्कृति” में है। हर हिंदू को संस्कृत पढ़नी चाहिए। वे स्वयं आज भी प्रतिदिन 18 घंटे अध्ययन करते हैं।
- चमत्कार पर दृष्टिकोण
उन्होंने कहा कि वे “चमत्कार को नमस्कार” नहीं करते। यही शिक्षा उन्होंने अपने शिष्य धीरेंद्र शास्त्री को भी दी कि केवल पढ़ाई और ज्ञान पर ध्यान दो। - संतों से अपील
रामभद्राचार्य ने कहा कि विधर्मी ताकतें संत समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में संतों को एकजुट होकर सनातन धर्म की रक्षा करनी चाहिए।
Outro
NewsMeto.in का मानना है कि समाज को जोड़ने और सनातन धर्म को मजबूत करने का कार्य संतों का कर्तव्य है। विवादों से दूर रहकर यदि सभी संत एकजुट हों तो सनातन की शक्ति और भी प्रबल होगी।
.हम सच को सामने लाते हैं ताकि पाठक स्वयं तय कर सकें कि असली मुद्दा क्या है।