परिचय
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत पर टेरिफ (Tariff) लगाने की बात कर रहे हैं। उनका यह कदम न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव पैदा कर सकता है बल्कि वैश्विक आर्थिक समीकरणों को भी बदल सकता है। अमेरिकी अर्थशास्त्री रिचर्ड वुल्फ ने ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत जैसे देश को छोटे देशों की तरह हल्के में नहीं लिया जा सकता।
रिचर्ड वुल्फ का बयान
रिचर्ड वुल्फ, जो न्यूयॉर्क के New School में प्रोफेसर हैं, ने कहा कि भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा जनसंख्या वाला देश है जिसने चीन को पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका अगर भारत को टेरिफ की धमकियां देना जारी रखता है, तो यह उसके लिए उल्टा पड़ सकता है। वुल्फ ने कहा कि वाशिंगटन भारत से वैसे बर्ताव नहीं कर सकता जैसे वह छोटे देशों—जैसे लेबनान—से करता है।
ब्रिक्स की मजबूती
वुल्फ का मानना है कि ट्रंप की यह नीति ब्रिक्स जैसे वैकल्पिक आर्थिक गुट को और मजबूत करेगी। भारत का रूस के साथ ऐतिहासिक रिश्ता रहा है और अगर अमेरिका दबाव डालता रहा तो भारत अपने विकल्पों को और तेज़ी से मजबूत करेगा।
अमेरिकी नेताओं की आलोचना
- माइक पेंस (पूर्व उपराष्ट्रपति): उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां और कंज्यूमर्स ही टेरिफ का सबसे बड़ा नुकसान झेल रहे हैं। उन्होंने फोर्ड कंपनी का उदाहरण दिया जिसे सिर्फ तीन महीनों में ₹6600 करोड़ (800 मिलियन डॉलर) टेरिफ के रूप में चुकाने पड़े।
- कर्ट कैमबेल (पूर्व उप विदेश मंत्री): उन्होंने चेतावनी दी कि ट्रंप की नीतियां भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती हैं और भारत को रूस के साथ रिश्तों पर अमेरिका के दबाव में नहीं आना चाहिए।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप को समझाने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। अर्थशास्त्री, राजनेता और यहां तक कि उनके पूर्व सहयोगी भी चेतावनी दे रहे हैं कि टेरिफ की यह जिद अमेरिकी अर्थव्यवस्था और भारत-अमेरिका रिश्तों दोनों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। अब यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि क्या ट्रंप इन चेतावनियों को सुनते हैं या नहीं।