राष्ट्रपति पुतिन को पीएम मोदी का न्योता, भारत में होगी 23वीं India-Russia Annual Summit
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फोन कॉल हुआ। इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को इस साल के अंत में भारत आने का निमंत्रण दिया है। यह निमंत्रण 23वीं भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक के लिए दिया गया है जो दोनों देशों के बीच नियमित उच्च स्तरीय संवाद का हिस्सा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस कॉल की जानकारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट X (पहले Twitter) पर साझा करते हुए लिखा,
“मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन के साथ बहुत अच्छी और विस्तार से बातचीत हुई। मैंने उन्हें यूक्रेन के हालात की जानकारी साझा करने के लिए धन्यवाद दिया। हमने अपने द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की और हमारे विशेष रणनीतिक संबंध को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मैं इस साल के अंत में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा को लेकर उत्साहित हूं।”
भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने गहरे और विशेष रिश्ते हैं। रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लंबे समय से जारी है। हर साल होने वाली वार्षिक शिखर बैठक इस सहयोग को नई दिशा देती है। इस साल की मीटिंग और भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें कई वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा संभावित है।
यूक्रेन युद्ध और भारत की भूमिका
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को यूक्रेन संघर्ष से जुड़ी ताजा स्थिति की जानकारी दी। भारत इस युद्ध में तटस्थ रुख अपनाते हुए हमेशा शांति और बातचीत का समर्थन करता आया है। प्रधानमंत्री मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर कह चुके हैं कि “आज का युग युद्ध का नहीं है।”
वैश्विक दबाव के बीच भारत का स्टैंड
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत को रूस से सस्ते दरों पर कच्चा तेल खरीदने के कारण कुछ देशों की आलोचना झेलनी पड़ी है। कई देशों ने इस पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए टैरिफ जैसी नीतियां लागू की हैं। इसके बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी और रूस के साथ अपने संबंधों को बनाए रखा है।
इस बातचीत से यह साफ़ होता है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के सिद्धांतों पर मजबूती से खड़ा है और वैश्विक दबावों से प्रभावित हुए बिना अपने रणनीतिक फैसले ले रहा है।
डोभाल की रूस यात्रा से पहले मिली थी झलक
इस कॉल से ठीक पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल रूस के दौरे पर गए थे और उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन से क्रेमलिन में मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इस मीटिंग ने शिखर बैठक की नींव तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है।
आने वाली वार्षिक बैठक से क्या उम्मीदें हैं?
23वीं India-Russia Annual Summit में दोनों देशों के बीच कई अहम समझौते संभव हैं। इसमें रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, ऊर्जा के नए प्रोजेक्ट्स, स्पेस मिशन में सहयोग, और व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने पर बातचीत होगी। इसके अलावा, यूक्रेन युद्ध और बदलती वैश्विक राजनीति के बीच दोनों देशों के साझा हितों की दिशा में नई रणनीति भी बनाई जा सकती है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राष्ट्रपति पुतिन को दिया गया भारत दौरे का निमंत्रण न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भारत अपनी विदेश नीति में आत्मनिर्भर और स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाता है।
इस साल के अंत में होने वाली India-Russia Annual Summit से दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद है। पुतिन की यह यात्रा भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने जा रही है।